रियल
एस्टेट का कारोबार करने वाली कम्पनियों के लिए वर्तमान समय उपयुक्त है.
क्योंकि निवेश के पुराने व परम्परागत रास्ते उतने सुरक्षित नहीं है. जैसे सोने-चांदी
में निवेश अब उतना आकर्षित नही करता, जितना
की हमेशा से करता रहा है। धातुओं में निवेश
काफी हद तक सुरक्षित रहा है। उसके पीछे दो प्रमुख कारण रहे हैं. एक तो कीमत के एवज में वह भौतिक रूप से
धातु उसके पास रहती है. दूसरा जब चाहे उसे तरल बनाया जा सकता है, यानि उसे बेच कर लिक्विड मनी प्राप्त
की जा सकती है.
परन्तु
सुरक्षा कारणों से धातु में निवेश के प्रति लोगों के रुझान में कमी आई है. साथ ही
धातु में बड़ा निवेश किया जा सकता है. बड़े निवेश के लिए पिछला दशक शेयर
बाज़ार के नाम रहा, परंतु इसमें बिरले ही लोगों ने ही
रुचि ली।
निम्न वर्ग से उच्च वर्ग तक के लोगों में, ज़ो धातु में निवेश को लेकर जो उत्सुकता रही है,
शेयर बाजार की व्यापक जानकारी न होने के कारण, उसमें लोगों
का रुझान नही रहा तथा लोगो के लिए शेयर में निवेश बिलकुल नया रहा।
चूंकि भारतीय परम्परागत समाज प्रत्यक्ष निवेश की
आर्थिक पद्यति पर निर्भर रहा है, जबकि शेयर बाजार अप्रत्यक्ष निवेश
की पद्यति पर काम करता है।
अप्रत्यक्ष पूजीं निवेश में अभी तक आम-जन मानस में
भरोसा नही जमा पाया है। कुछ समय पहले तक बीमा कंपनियों ने तमाम पालिसियों के
माध्यम से बाजार में निवेश के लाभ का कुछ हिस्सा अपने ग्राहकों को देने का आश्वासन
दिया था। परंतु वह भी पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाये परिणामस्वरूप जनता में एक बार फिर
संदेश गया कि अप्रत्यक्ष पूंजी निवेश सदैव ही जोखिम भरा हुआ है।
पुनः बता दे कि भारतीय समाज आर्थिक रूप से जोखिम उठाने
की कम मान्यता देता है। जनता की सोच कि अनुसार जमीन-जायजाद में निवेश कम जोखिम भरा
है, तथा बेहतर है रियल एस्टेट में सुरक्षा को लेकर किसी तरह की कोई परेशानी नही
होती।
रियल एस्टेट में बढ़ते हुए निवेश से बात तो बात साबित
हो चुकी है कि रियल एस्टेट में निवेश सबसे सुरक्षित व टिकाऊँ है। इसमें कोई विशेष जोखिम
भी नही है चूंकि रियल एस्टेट में फ्लैट व विल्डअप एरिया को छोड़ दे, तो कोई ऐसा रियल एस्टेट उत्पाद नही है जिसके कीमत में लगातार बढ़ोत्तरी न होती
हो।
प्लाट, विला, इंडिपेंडेंट हाउस, रो-हाउस का रेट सदैव बढ़ता है। रियल
एस्टेट के जानकार लोगों के मुताबिक रियल एस्टेट भविष्य में बढ़ता ही रहेगा। उसका बड़ा कारण है जमीन
दिन- ब- दिन घट रही है. जबकि खरीददारों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है
इसमें अर्थशास्त्र का सामान्य सिद्धांत का करता है जिसमें कहा गया की जिस
वस्तु का उत्पादन उसकी मांग की अपेक्षा कम है उसके कीमत में बढ़ोत्तरी अवश्यमभावी है। इस प्रकार देखा जाय तो जमीन, प्लाट, फ़ार्मिंग लैंड, एग्रीकल्चर फार्म में जो निवेश करता है उसे सालाना कम से कम 30 प्रतिशत वृद्धि
होती है।
यानि 3 वर्ष में लागत दोगुना हो जाता है।
तीन वर्ष में प्रापर्टी का दाम दोगुना होना सामान्य बात है। परंतु प्लाट या प्रापर्टी
व्यस्थित टाउनशिप में हो या अच्छे प्रकल्प में हो तो बढ़ोत्तरी के बारे में कल्पना नही
की जा सकती है।
कुछ निवेश तो लागत को एक वर्ष में दोगुना
कर देते हैं लेकिन ऐसे अवसर कम मिलते हैं ऐसे
अवसर को लोगों को तलाश रहती है।
जो लोग पहली बार प्रापर्टी में निवेश करते
हैं वो सोचने में, या योजना को कार्यरूप देने
में समय लगाते है, परंतु जो लोग प्रापर्टी में निवेश का लाभ उठा
चुके हैं उनके लिए निवेश एक बेहतरीन अवसर की तरह होता है वह बिना देर किए प्रापर्टी
में निवेश करते हैं।
क्योकि प्रापर्टी के लाभ सीधा संबंध समय
से है। इसलिए प्रापर्टी में निवेश के लिए त्वरित निर्णय लेना समझदारी है। उदाहरण के
लिए जैसे की प्रोजेक्ट शुरू होने वाला हो या शुरू हो रहा हो उस समय उसमें निवेश का
समय सब उपयुक्त होता है।
निवेशक की दूरदर्शिता ही रकम को बढ़ाने में
कामयाब होती है जबकि प्रोजेक्ट शुरू होता है तो उसके भौतिक स्वरूप किसी के सामने नही
होता तथा कोई आकर्षण का बिन्दु नही होता है। इसलिए ग्राहक इस स्वरूप को लेकर सशंकित
रहता है। जबकि निवेशक को विश्वास होता है और उसकी दूरदर्शिता परख लेती है कि उसकी मूलभूत
सरंचना का विकास होगा तो यहाँ की कीमत आसमान छूने लगेगी।
-संजय
कुमार सिंह
(लेखक- भूमिटेक ड्वलपर्स प्रा॰ लि॰ के प्रबंध
निदेशक हैं। )
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